समेस्टर अध्ययन
संपूर्ण पवित्र बाइबल का एक मार्गदर्शक अध्ययन
न्यू टेस्टामेंट के आरंभ से शुरूआत करके संपूर्ण बाइबल की शैक्षिक यात्रा का अनुभव लीजीए। चाहे आप पहली बार कर रहे हों या अनुभवी बसइबल अध्ययनकर्ता, धर्मग्रंथों के माध्यम से ऑनलाइन स्कूल बाइबल संबंधी अध्ययन का एक श्रोष्ठ प्लेटफार्म है। हमारा पाठ्यक्रम बाइबल की प्रत्येक पुस्तक का गहन अध्ययन उपलब्ध करवाता है, प्रत्येक छन्द को इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संदर्भ और अन्य के साथ देखा जाता है। धर्मग्रंथों के माध्य से एक समय में एक ही कोर्स लेने के लिए डिजाइन किया गया है। जैसे ही आप एक कोर्स पूरा करते हैं, आपको आगे बढ़ने के साथ प्रत्येक कोर्स के लिए अलग भुगतान के साथ आपको अगला प्रस्तुत किया जाता है।
अपनी गति के अनुसार सीखें
धर्मग्रंथों के माध्यम से ऑनलाइन स्कूल आपको सीखने के लिए एक निर्मित ढांचा प्रदान करता है, जबकि इसके साथ ही आपको अपनी गति के साथ अध्ययन करने में समर्थ बनाता है। यह सीखने के सभी स्तरों के लिए शानदार है
अपनी प्रगति देखें
अपनी मेहनत के फल देखें जब प्रत्येक कक्षा पूरी होने के साथ आपके प्रतिलेख बढ़ते जाते हैं। जब आप निश्चित कोर्स समूह पूरा कर लेते हैं आपको उपलब्धि का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
एक कोर्स के साथ क्या आता है?
प्रत्येक कोर्स आपकी जरूरत की हर एक चीज के साथ मिलता है। अमूल्य डिजीटल पाठ्यपुस्तक सहित डाउनलोड सामग्री कोर्स के समाप्त होने पर आपके अपने पास रखने के लिए हैं।
अनुभवी प्रोफेसरों और विद्वानों द्वारा लिखित एक डिजिटल पाठ्यपुस्तक
मुख्य अवधारणाओं की पहचान में मदद के लिए 5 अध्ययन गाइडें
सफलतापूर्वक अध्ययन सुनिश्चित करने के लिए 6 परीक्षाएं
आपको ट्रेक पर बने रहने में मदद के लिए एक अध्ययन गति गाइड
अनुपूरक सामग्रियां जैसे नक्शे, चार्ट, वीडियो और बहुत कुछ
स्कूल मैं कौन-कौन से कोर्स हैं?
आपका पहला कोर्स “यीशू मसीह का जीवन,1” होगा। “यीशू मसीह का जीवन,1” पूरा करने के बाद आप दूसरा कोर्स, “यीशू मसीह का जीवन,2” खरीदेंगे। जैसे-जैसे आप प्रत्येक कोर्स पूरा करेंगे, आपके आगे बढ़ने के साथ प्रत्येक कोर्स का भुगतान करने पर आपको अगला कोर्स प्रस्तुत किया जाएगा। नीचे वे सभी कोर्स है जो आप अध्ययन करेंगे, क्रम में सूचीबद्ध हैं जो आप लेंगे।
आपको कोर्सों के विशिष्ट समूह को पूरा करने पर उपलब्धि प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। ये समूह निम्नलिखित रंग द्वारा निरूपित किए गए हैं।
न्यू टेस्टामेंट
मसीह का जीवन,1
डेविड एल.रोपर के मसीह के जीवन के विषय में गहरे विचार उसके जन्म से प्रारम्भ होते हैं और वे सुसमाचार के चार विवरणों से उसके जीवन के समानांतर वृत्तान्त को प्रस्तुत करते हैं।मसीह का जीवन, 2
डेविड एल.रोपर के अध्ययन, मसीह का जीवन का दूसरे भाग से यीशु के जीवन के अंतिम दिन, जिसमें उसकी मृत्यु, दफन और जी उठना सम्मिलित है।मत्ती 1—13
मत्ती की अपनी कमेंट्री के पहले भाग में, सेलर्स एस. क्रेन, जूनियर ने राजा के जन्म और आने वाले राज्य के विषय पर उसकी शिक्षाओं की समीक्षा की है। उन्होंने बताया कि कैसे यीशु के प्रति लोगों की प्रतिक्रियाएं तूफान का रूप लेने लगीं।मत्ती 14—28
सुसमाचार के मत्ती के विवरण के अपने अध्ययन के पहले भाग में सेलर्स एस. क्रेन, जूनियर ने यीशु की पृथ्वी पर की सेवकाई के दौरान उसकी दी शिक्षाओं और किए गए उसके कामों के विश्लेषण को जारी रखा है। बहुत से लोगों ने राजा के रूप में उसकी भूमिका को गलत समझ लिया था और जिन्होंने उसे ठुकरा दिया था उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ा दिया था। मरे हुओं में से उसके जी उठने और पिता के पास ऊपर उठा लिए जाने के बाद ही मसीह के चेलों को उसके जीवन और मृत्यु के महत्व की समझ आने लगी थी।मरकुस 1—8
मरकुस यीशु को एक दीन सेवक के रूप में, बातें करने वाले व्यक्ति से बढ़कर काम करने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाता है। जिस कारण यीशु के जीवन और सेवकाई के इस रिकॉर्ड में उसकी शिक्षाएं नहीं बल्कि उसके काम प्रमुखता से दिखाए गए हैं। मार्टल पेस (Martel Pace)ल्युक 1:1—9:50
यह कोर्स अभी उपलब्ध नहीं है। यह भविष्य के लिए योजना किया गया है।मरकुस 9—16
मरकुस यीशु को एक दीन सेवक के रूप में, अर्थात बातें करने वाले आदमी के बजाय काम करने वाले आदमी के रूप में दिखाता है। जिस कारण यीशु के जीवन तथा सेवकाई के इस विवरण में यीशु की शिक्षाएं नहीं बल्कि उसके काम अधिक बताए गए हैं। मार्टल पेस (Martel Pace)ल्युक 9:51—24:53
यह कोर्स अभी उपलब्ध नहीं है। यह भविष्य के लिए योजना किया गया है।जॉन 1—10
यह कोर्स अभी उपलब्ध नहीं है। यह भविष्य के लिए योजना किया गया है।जॉन 11—21
यह कोर्स अभी उपलब्ध नहीं है। यह भविष्य के लिए योजना किया गया है।प्रेरितों 1—14
डेविड एल. रोपर प्रेरितों 1-14 में दिखाए गए प्रभु की कलीसिया के आरम्भ के विवरणों की गहराई में ले जाते हैंप्रेरितों 15—28
डेविड एल. रोपर यह अध्ययन प्रेरितों 15-28 में वर्णित पौलुस की मिशनरी यात्राओं के सामर्थपूर्ण विवरणों पर केन्द्रित है।रोमियों 1—7
डेविड एल. रोपर पौलुस की शिक्षा को समझाते हैं कि उद्धार मूसा की व्यवस्था की आज्ञा मानने से नहीं मिलता। न ही यह निजी गुणों या भलाई से मिलता है। यहूदियों और अन्यजातियों दोनों को यह बताया गया है कि उद्धार अनुग्रह से मिलता है, जिसे परमेश्वर देता है, और मनुष्य का वफादारी से उसकी आज्ञा मानना भी आवश्यक है।रोमियों 8—16
यह देखते हुए कि पौलुस ने किस प्रकार रोम के मसीही लोगों को बदले हुए जीवन को जीने और मसीह की देह की विजय को दूसरों के साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया, डेविड एल. रोपर ने रोमियों की पुस्तक में अपने लेख को जारी रखा है।1 कोरिंथियंस
इस पत्री में पहली सदी के कुरिन्थियों के मसीहियों को, पौलुस ने कई प्रश्नों को थोड़े बदलाव के साथ सम्बोधित किए, जो आज भी कलीसिया के लिये समस्या का कारण है। फूट, अनैतिकता, सैद्धातिक भ्रम और सांसारिकता ने इस मण्डली को उलझन में डाल रखा था; और उनके क्लेश—घमण्ड—की एक जड़ अभी भी हमारे बीच में आम है। डूआन वार्डन की आयत-के बाद-आयत का अध्ययन बाइबिल आधारित पाठ में कठिन मुद्दों को हल करता है और हमारे अपने समय में रहने वाले मसीहियों के लिये व्यावहारिक अनुप्रयोग को दर्शाता है। पौलुस जानता था कि सभा से सम्बन्धित क्लेशों पर नियन्त्रण पाने की कुंजी प्रेम है। अध्याय 13 में अपनी सुविख्यात और परिचित चर्चा में, प्रेरित ने परिभाषित किया और इस तरह के प्रेम का वर्णन किया जो कलीसिया के निर्माण के लिये आवश्यक है कि मसीह क्या चाहता है।2 कोरिंथियंस
कुरिन्थुस में पहली शताब्दी के मसीहियों को लिखे इस पत्र में, पौलुस ने अधिकार और एकता जैसे प्रश्नों को सम्बोधित किया, जो आज भी कलीसिया को परेशान कर रहे हैं। डुएन वार्डेन का आयत-दर-आयत अध्ययन बाइबिल के पाठ में कठिन मुद्दों को सुलझाता है और शुद्ध मसीही जीवन के लिये अनुरोध करता है।गलाटियन्स
गलातिया के मसीहियों के नाम पौलुस का पत्र नई कलीसियाओं की उन शिक्षकों से रक्षा करने के लिए लिखा गया जो यह चाहते थे कि उद्धार पाने के लिए अन्यजातियों का खतना किया जाए। इस मांग को पूरा करने से उद्धार के उनके एकमात्र माध्यम मसीह में उनका विश्वास नष्ट हो जाना था। पौलुस की इस पत्री में सुसमाचार के वास्तविक महत्व पर ज़ोर दिया गया है। मसीह में सब को एक समान बचाया गया है। भाइयों और बहनों के रूप में हमें जातीयता या आर्थिक स्थिति जैसी विभाजित करने वाली रेखाओं के बिना, मिलकर आराधना और सेवा करनी आवश्यक है। आज के मसीही लोगों के लिए अत्याधिक मूल्यवान टीका का आकार देने के लिए जैक मैकिनी ने यूनानी भाषा की अपनी विस्तृत पृष्ठभूमि का इस्तेमाल किया।इफिसियों और फिलिप्पियों
लेखकों ने इफिसुस (जे लॉकहार्ट) और फिलिप्पी (डेविड एल. रोपर) की आरम्भिक कलीसियाओं के नाम पौलुस के इन दो पत्रों का व्यवहारिक अध्ययन प्रस्तुत किया है। मसीही लोगों से सांसारिकता के विरुद्ध युद्ध में डटने और मसीह की देह के अंग और स्वर्ग के नागरिक होने के नाते एक होने को कहा गया है।कुलुस्सियों और फिलेमोन
कुलुस्सियों की पुस्तक की अनन्त सच्चाइयों और सबकों से पहली सदी की कलीसिया को आकार देने में सहायता मिली। पौलुस ने मसीही लोगों को समझाया कि भक्तिपूर्ण जीवन शैली को कैसे बनाए रखना है और विभिन्न विश्वासों वाले समाज में मसीह को ऊंचा करना है। फिलेमोन की पुस्तक जो लगभग उसी समय लिखी गई मसीही सम्बान्धों के लिए मार्गदर्शन देती है। ओवेन डी. ऑलब्रिश्ट और ब्रूस मैकलार्टी ने व्यवहारिक सबक तैयार किए हैं।1 और 2 थिस्सलुनीकियों
अर्ल डी. एडवर्ड की इस पुस्तक में थिस्सलुनीके के नये विश्वासियों के लिए इस भाग को वाक्य के अंत में रखें तो पढ़ना आसान लगेगा जिनको क्लेश का सामना करते हुए उत्साह की आवश्यकता थी। पुस्तक मसीह के दूसरे आगमन पर उस शिक्षा को जिस पर आज आमतौर पर लोगों में नासमझी पाई जाती है, प्रेरित के निर्देश को समझाने का काम करती है1 और 2 टिमोथी और टाइटस
जब पौलुस अपने जीवन के अंतिम क्षणों की ओर अग्रसर हो रहा था तो उसने अपने आत्मिक “पुत्र” तीमुथियुस और तीतुस को उनके सेवा क्षेत्र इफिसुस और क्रेते में, उत्साहिसत करने और ईश्वरीय अगुआई देने के लिए लिखा। पौलुस ने उनसे आग्रह किया कि वे प्रभु की कलीसिया को प्रभावकारी व फलदायक सेवा प्रदान करें और उनको सत्य की रक्षा करना, उसको थामे रहना और उसका अभ्यास करना था। डेविड रोपर (David Roper)इब्रानियों
बाइबल की सबसे लुभावनी पुस्त कों में से एक इब्रानियों की शिक्षा और थियोलॉजी से मसीह की हमारी समझ और पूरी बाइबल की हमारी समझ को आकार देने में सहायता मिली है। मार्टल पेस ने पुस्तक के लेखक की पहचान की थ्योरियों की समीक्षा की है और विश्वास के चलन के साथ-साथ मसीह और उसके काम को बारीकी से बताया है। मसीही लोगों को याद दिलाते हुए कि उन्होंने मसीह के प्रति निष्ठा क्यों रखी है, यह पुस्तकक अद्भुत प्रोत्साहन देती है।याकूब की पत्री
जे. डब्ल्यू. रॉबर्ट्स इस सामान्य पत्री की जानकारी इकट्ठा करते हैं जो मसीहियों के लिये विश्वास के मार्ग को रेखांकित करती है। वह पहाड़ी उपदेश के साथ-साथ विश्वास और कर्मों के बीच सम्बन्ध में उल्लेखनीय समानताएँ बताते हैं। यह सम्पूर्ण व्याख्या किसी भी मसीही के परमेश्वर के साथ चलने को मजबूत करेगी, क्योंकि यह वास्तविक भक्ति, विश्वास और ज्ञान पर चर्चा करती है। (भाग 1)
हालांकि जेम्स की किताब पहली सदी की कलीसिया के लिए लिखी गई थी, लेकिन यह आज भी पढ़ने वालों को ईश्वर के अनुसार जीवन जीने के लिए व्यावहारिक सलाह देती है। इस कमेंट्री में, और डुएन वार्डन की किताब पहली सदी की कलीसिया के लिए लिखी गई थी, लेकिन यह आज भी पढ़ने वालों को ईश्वर के अनुसार जीवन जीने के लिए व्यावहारिक सलाह देती है। इस कमेंट्री में, डुआन वार्डन ने जेम्स की उन बातों पर विस्तार से चर्चा की है जिनमें ज्ञान पाने, विनम्र रहने, भेदभाव न करने, अपनी ज़बान पर काबू रखने और "ईश्वर के वचन पर अमल करने वाला" बनने की सीख दी गई है।

