याकूब की पत्री
इस कोर्स में जेम्स की किताब का अच्छी तरह से अध्ययन करने के लिए दो कमेंट्री का इस्तेमाल किया जाता है। जब स्टूडेंट J.W. रॉबर्ट्स की ‘द लिविंग वर्ड कमेंट्री’ का अध्ययन और टेस्ट पूरा कर लेगा, तो वह डुआन वार्डन की ‘ट्रुथ फॉर टुडे कमेंट्री’ पर आगे बढ़ेगा। और डुएन वार्डन.
‘लिविंग वर्ड कमेंट्री’ में, जे. डब्ल्यू. रॉबर्ट्स इस आम पत्र (general epistle) पर चर्चा करते हैं, जो ईसाइयों के लिए विश्वास के साथ जीने का तरीका बताता है। वे ‘पहाड़ पर दिए गए उपदेश’ (Sermon on the Mount) और विश्वास व कर्मों के बीच के संबंध जैसी उल्लेखनीय समानताएँ बताते हैं। यह विस्तृत व्याख्या किसी भी ईसाई के ईश्वर के साथ चलने के अनुभव को मज़बूत करेगी, क्योंकि इसमें सच्चे धर्म, विश्वास और ज्ञान पर चर्चा की गई है।
हालांकि जेम्स की किताब पहली सदी की कलीसिया को लिखी गई थी, फिर भी यह आज भी पाठकों को ईश्वर-भक्तिपूर्ण जीवन जीने के लिए व्यावहारिक सलाह देती है। ‘ट्रुथ फॉर टुडे कमेंट्री’ में, और डुएन वार्डन इसमें जेम्स की उन ज़रूरी बातों पर विस्तार से चर्चा की गई है जिनमें ज्ञान पाने, विनम्र रहने, पक्षपात से बचने, ज़बान पर काबू रखने और “परमेश्वर के वचन पर अमल करने वाला” बनने की बात कही गई है। प्रभु के भाई ने उन यहूदी भाइयों का हौसला बढ़ाया जो “दूर-दूर तक फैल गए थे” और जिन्हें सताया जा रहा था। कल की अनिश्चितता को देखते हुए, उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभु न्याय के दिन वापस आएंगे। उन्होंने मसीह के मानने वालों से कहा कि वे अपने मरे हुए विश्वास को जगाएं और दिखाएं कि ईसाई धर्म को असल ज़िंदगी में कैसे अपनाया जाता है।

